Sutra 43 from Patanjali’s Yogasutras
स्मृतिपरिशुद्धौ स्वरूपशून्येवार्थमात्रनिर्भासा निर्वितर्का ॥४३॥ पदविभाग: स्मृति-परिशुद्धौ, स्वरूप-शून्या, इव, अर्थ-मात्र-निर्भासा, निर्वितर्का। अन्वय: स्मृतिपरिशुद्धौ स्वरूपशून्या इव अर्थमात्रनिर्भासा निर्वितर्का । …